सदी के आखिरी 25 वर्षों के दौरान किए गए पारिस्थितिक अनुसंधानों ने खनन, राजमार्ग निर्माण और वन प्रदेशों में की जाने वाली ऐसी अन्य अन्तर्वेधी गतिविधियों के कारण हुए आवास खण्डन के हानिकर प्रभावों को सिद्ध किया है । जब जंगलों का एक बड़ा खण्ड और छोटे टुकड़ों में विखण्डित हो जाता है, तो इन सभी टुकड़ों के कोर मानवीय क्रियाकलापों के संपर्क में आ जाते हैं और इसका परिणाम होता है संपूर्ण वन प्रदेश का अपकर्ष । वनाच्छादित भू-प्रदेशों और गलियारों का सातत्य भंग हो जाता है जिससे वन्य-जीवन की अनेक विलोप-प्रवण जातियाँ प्रभावित होती हैं । इस प्रकार जैव-विविधता संरक्षण को सबसे गंभीर खतरा आवास-खण्डन से माना जाता है । खनन कम्पनियों को वन भूमि का तदर्थ-अनुदान, साथ ही निरंकुश गैर-कानूनी खनन इस खतरे को और बढ़ा रहे हैं ।
इस परिच्छेद का केंद्र-बिन्दु क्या है ?
इस परिच्छेद का केंद्र-बिन्दु क्या है ?