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Q. 39
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विश्व के अनेक भागों में कानून कृषि-कर्म (स्लरी) को जलमागों में छोड़ने को तेजी से प्रतिबंधित कर रहा है । सबसे सरल एवं प्रायः सबसे किफायती पद्धति पदार्थ को भूमि पर अर्ध-ठोस खाद अथवा छिड़काव योग्य कर्म (स्लरी) के रूप में वापस कर देने की है । यह पर्यावरण में इसके गाढ़ापन को कम कर, जो एक अधिक आदिम एवं धारणीय प्रकार की कृषि में हो सकता था, प्रदूषक को उर्वरक में परिवर्तित कर देता है । मिट्टी के सूक्ष्मजीव गंदे पानी एवं कर्म के जैविक संघटकों को अपघटित कर देते हैं और इस प्रकार अधिकतर खनिज पोषक तत्त्व वनस्पति द्वारा पुनः अवशोषित किए जाने हेतु उपलब्ध हो जाते हैं ।

कृषि-वाहित जल (और मानव मल-जल) के माध्यम से नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस दोनों आधार वाले पोषकों के अधिक निवेश ने अनेक 'लाभप्रद' मित-पोषणी झीलों (जिनमें निम्न पोषक सान्द्रण, निम्न पादक उत्पादकता और अधिक जलीय खरपतवार एवं स्वच्छ जल विद्यमान होता है) को सुषोषी दशाओं में बदल दिया है, जहाँ उच्च पोषक निवेश से उच्च पादकफलक उत्पादकता

(कभी-कभी फुलिका निर्मात्री विषैली जातियों की प्रधानता के साथ) परिणामित हुए हैं। इससे जल गंदला हो जाता है, बड़े पादप विलुप्त हो जाते हैं तथा सबसे खराब स्थिति में अन्नोक्सिता होकर मछलियों की मृत्यु हो जाती है। यह तथाकथित संवर्धनी सुपोषण है। इस प्रकार वन्य-शिकार मछलियों की संभारण सेवाओं और मनोरंजन से सम्बन्धित सांस्कृतिक सेवाओं समेत, महत्त्वपूर्ण पारितंत्र सेवाएँ समाप्त हो जाती हैं।

कुछ समय से, झीलों के संवर्धनी सुपोषण की प्रक्रिया समझी जा रही है। लेकिन वैज्ञानिकों का, महासागरों में नदियों के मुहाने के समीप विशाल 'मृत क्षेत्रों', विशेषकर उत्तरी अमेरिका में मिसीसीपी एवं चीन में यांग्सी जैसे विशाल जलग्रहण क्षेत्रों के अपवाह पर, हाल ही में ध्यान गया है। पोषण-तत्त्वों से समृद्ध जल, धाराओं, नदियों और झीलों के माध्यम से प्रवाहित होता है एवं अंततः मुहानों (एस्चुएरी) एवं महासागर में पहुँचता है जहाँ पारितंत्र प्रभाव बहुत अधिक हो सकता है; वस्तुतः 70,000 वर्ग किलोमीटर तक विस्तृत क्षेत्र में सभी अकशेरुकी एवं मछलियों की मृत्यु हो जाती है। अब सम्पूर्ण विश्व में 150 से अधिक समुद्री क्षेत्र, कृषि-वाहित उर्वरक और बड़े नगरों के मल-जल से विशेषतः नाइट्रोजन से समृद्ध होने से शैवाल पुंजों के अपघटित होने के परिणामस्वरूप लगातार ऑक्सीजन से वंचित हो रहे हैं। महासागरी मृत क्षेत्र औद्योगिक राष्ट्रों से विशेष रूप से सम्बद्ध हैं, तथा ये क्षेत्र प्रायः उन देशों से लगे हुए हैं जो किसानों को उत्पादकता बढ़ाने और अधिक उर्वरक के प्रयोग के लिए उनको कृषि हेतु आर्थिक सहायता देकर प्रोत्साहित करते हैं।

परिच्छेद के अनुसार, उर्वरकों के अन्धाधुन्ध प्रयोग के प्रभाव क्या हैं ?

A
  1. मिट्टी एवं जल में प्रदूषकों की वृद्धि ।
B
  1. मिट्टी में अपघटन करने वाले सूक्ष्मजीवों का विनाश ।
C
  1. जलाशयों में पोषकों का संवर्धन ।
D
  1. शैवाल पुंजों का बनना ।
Kepler. Discussing PYQs. Q.no. 39