2020 तक, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में 5.6 करोड़ (56 मिलियन) युवाओं की कमी होने की आशंका है तब भारत अपने 4.7 करोड़ (47 मिलियन) अधिशेष युवाओं से इस कमी को पूरा कर सकता है। भारत में दो अंकों में विकास निर्मुक्त करने के एक मार्ग के रूप में श्रम सुधारों को इसी सन्दर्भ में प्रायः उद्घृत किया जाता है। 2014 में, भारत का श्रमबल जनसंख्या का लगभग 40 प्रतिशत होने का आकलन था, लेकिन इस बल का 93 प्रतिशत असंगठित क्षेत्र में था। विगत पूरे दशक में रोजगार की चक्रवृद्धि वार्षिक संवृद्धि दर [कम्पाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR)] 0.5 प्रतिशत तक मन्द हो चुकी थी, जहाँ पिछले वर्ष के दौरान लगभग 1.4 करोड़ (14 मिलियन) नौकरियाँ सृजित हुई
जबकि श्रमबल में लगभग 1.5 करोड़ (15 मिलियन) की वृद्धि हुई।
निम्नलिखित में से कौन-सा, उपर्युक्त परिच्छेद का सर्वाधिक तार्किक निष्कर्ष (इन्फरेंस) है?
निम्नलिखित में से कौन-सा, उपर्युक्त परिच्छेद का सर्वाधिक तार्किक निष्कर्ष (इन्फरेंस) है?