वायु गुणता सूचकांक [एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI)] बहुत से वायु प्रदूषणों की मापों को एकल संख्या अथवा अनुमातांक (रेटिंग) में जोड़कर दिखाने का एक तरीका है। आदर्श रूप में, इस सूचकांक को सतत रूप से अद्यतन (अपडेट) बनाए रखा जाता है और यह विभिन्न स्थानों पर उपलब्ध रहता है। AQI सर्वाधिक उपयोगी तब होता है जब बहुत सारे प्रदूषण-आँकड़े एकत्रित किए जा रहे हों, और जब प्रदूषण के स्तर, हमेशा तो नहीं, लेकिन आमतौर पर निम्न रहते हों। इन दशाओं में, यदि प्रदूषण-स्तर कुछ दिनों के लिए अचानक बढ़ जाए, तो जनता वायु गुणता चेतावनी की प्रतिक्रिया में शीघ्रता से निरोधक कार्रवाई (जैसे कि घर के भीतर रहना) कर सकती है। दुर्भाग्य से, शहरी भारत की हालत ऐसी नहीं है। कई बड़े भारतीय शहरों में प्रदूषण-स्तर इतने अधिक होते हैं कि वे वर्ष के ज्यादातर दिनों में स्वास्थ्य के मानकों अथवा नियामक मानकों से ऊपर बने रहते हैं। यदि हमारा सूचकांक दिन पर दिन 'लाल/खतरनाक' दायरे में बना रहता है, तो किसी के लिए भी ज्यादा कुछ करने लायक नहीं रहता सिवाय इसके कि इनकी उपेक्षा करने की आदत बना लें।
61. उपर्युक्त परिच्छेद से, निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक और तर्कसंगत निष्कर्ष (इन्फरेंस) निकाला जा सकता है?
- (a) हमारे शहरों को प्रदूषण-मुक्त रखने के लिए हमारी सरकारें पर्याप्त रूप से जिम्मेवार नहीं हैं।
- (b) हमारे देश में वायु गुणता सूचकांकों की बिल्कुल ही आवश्यकता नहीं है।
- (c) हमारे बड़े शहरों के बहुत-से निवासियों के लिए वायु गुणता सूचकांक सहायक नहीं है।
- (d) प्रत्येक शहर में, प्रदूषण-सम्बन्धी समस्याओं के बारे में जन-जागरूकता बढ़नी चाहिए।
61. उपर्युक्त परिच्छेद से, निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक और तर्कसंगत निष्कर्ष (इन्फरेंस) निकाला जा सकता है?
61. उपर्युक्त परिच्छेद से, निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक और तर्कसंगत निष्कर्ष (इन्फरेंस) निकाला जा सकता है?