भारतीय विनिर्माण के लिए मध्यावधि चुनौती, निम्नतर से उच्चतर प्रौद्योगिक क्षेत्रों, निम्नतर से उच्चतर मूल्यवर्धित क्षेत्रों और निम्नतर से उच्चतर उत्पादकता क्षेत्रों की ओर बढ़ने की है। मध्यम प्रौद्योगिक उद्योगों में मुख्य रूप से अत्यधिक पूँजी लगी होती है और उनमें संसाधनों का प्रक्रमण होता है; और उच्च प्रौद्योगिक उद्योगों में मुख्य रूप से अत्यधिक पूँजी और प्रौद्योगिकी लगी होती है। सम्पूर्ण GDP में विनिर्माण के हिस्से को प्रकल्पित 25 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को, विश्व-बाजार के उन क्षेत्रों पर कब्जा करने की आवश्यकता है, जिनमें बढ़ती हुई माँग की प्रवृत्ति है। इन क्षेत्रों में अधिकांश रूप से उच्च प्रौद्योगिकी और पूँजी लगी होती है।
64. उपर्युक्त परिच्छेद से, निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक और तर्कसंगत निष्कर्ष (इन्फरेंस) निकाला जा सकता है?
- (a) मध्यम प्रौद्योगिक और संसाधनों का प्रक्रमण करने वाले उद्योगों में, भारत की GDP, उच्च मूल्य-वर्धित तथा उच्च उत्पादकता स्तरों को दर्शाती है।
- (b) भारत में अत्यधिक पूँजी और प्रौद्योगिकी वाले विनिर्माण का संवर्धन करना सम्भव नहीं है।
- (c) भारत को, अनुसंधान एवं विकास, प्रौद्योगिकी उन्नयन और कौशल विकास में, सरकारी निवेश बढ़ाना चाहिए और गैर-सरकारी निवेशों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
- (d) भारत ने पहले से ही विश्व-बाजार के उन क्षेत्रों में बड़ा हिस्सा प्राप्त कर लिया है, जिनमें बढ़ती हुई माँग की प्रवृत्ति है।
64. उपर्युक्त परिच्छेद से, निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक और तर्कसंगत निष्कर्ष (इन्फरेंस) निकाला जा सकता है?
64. उपर्युक्त परिच्छेद से, निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक और तर्कसंगत निष्कर्ष (इन्फरेंस) निकाला जा सकता है?