IMF ने ध्यान दिलाया है कि एशिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के समक्ष 'मध्यम-आय जाल (मिडिल-इन्कम ट्रेप)' में पड़ जाने का संकट बना हुआ है। इसका आशय यह है कि इन देशों की औसत आय, जो कि अब तक तेजी से बढ़ती रही है, एक बिन्दु से आगे बढ़ना बंद कर देगी—एक ऐसा
बिन्दु जो कि विकसित पश्चिमी जगत् की आय से काफी कम है। IMF, आधारभूत संरचना से लेकर कमजोर संस्थाओं तक और अपर्याप्त रूप से अनुकूल समष्टि-आर्थिक (मैक्रोइकॉनॉमिक) दशाओं तक, मध्यम-आय जाल के कई कारणों की पहचान करता है—जिनमें से कोई भी आश्चर्यजनक नहीं है। परन्तु, IMF कहता है कि सर्वरूपेण कारण उत्पादकता की वृद्धि में गिरावट है।
44. उर्ध्वगतिशीलता से निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक, तर्कसंगत और विवेचनात्मक निष्कर्ष (इन्फरेंस) निकाला जा सकता है?
- (a) किसी देश के मध्यम-आय अवस्था में पहुँच जाने से उसकी उत्पादकता में हास होने का खतरा होता है, जिसके परिणामस्वरूप आय की वृद्धि रुक जाती है।
- (b) मध्यम-आय जाल में फँसना तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्थाओं की एक सामान्य विशेषता है।
- (c) एशिया की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के लिए वृद्धि की गति को बनाए रखने की कोई आशा नहीं है।
- (d) जहाँ तक उत्पादकता की वृद्धि का प्रश्न है, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं का निष्पादन संतोषजनक नहीं है।
44. उर्ध्वगतिशीलता से निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक, तर्कसंगत और विवेचनात्मक निष्कर्ष (इन्फरेंस) निकाला जा सकता है?
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