हम डिजिटल काल में रहते हैं। डिजिटल सिर्फ़ ऐसी कोई चीज़ नहीं है जिसका उपयोग कार्यनीतिक रूप से और विशिष्ट तौर पर कुछ कार्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है। हमारा यह प्रत्यक्ष-ज्ञान कि हम कौन हैं, और हमारे चारों ओर की दुनिया से हम किस प्रकार जुड़ते हैं, और वे तरीके जिनसे हम अपने जीवन, श्रम और भाषा के प्रभाव-क्षेत्रों को परिभाषित करते हैं, बड़े पैमाने
पर डिजिटल प्रौद्योगिकियों द्वारा ही संरचित हैं। डिजिटल हर जगह विद्यमान है और हवा की तरह अदृश्य है। हम डिजिटल व्यवस्थाओं के अंदर रहते हैं, हम अन्तरंग गैजेटों (Gadgets) के साथ जीते हैं, हमारी पारस्परिक क्रियाएँ डिजिटल माध्यमों के द्वारा होती हैं, और डिजिटल की मौजूदगी तथा उसकी कल्पना ने हमारे जीवन को प्रभावशाली ढंग से पुनर्संरचित कर दिया है। डिजिटल, सिर्फ एक उपकरण मात्र होने से अधिक, वह दशा और सन्दर्भ है जो हमारे आत्म-बोध, समाज-बोध और शासन संरचना बोध के आकार और सीमाओं को परिभाषित करता है।
43. निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक और सारभूत सन्देश है, जो उपर्युक्त परिच्छेद द्वारा व्यक्त किया गया है?
- (a) डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर शासन की सभी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
- (b) डिजिटल प्रौद्योगिकियों की बात करना हमारे जीवन और जीवनचर्या की बात करना है।
- (c) हमारी रचनात्मकता और कल्पना को डिजिटल माध्यमों के बिना अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता।
- (d) डिजिटल तंत्रों का उपयोग भविष्य में मानव के अस्तित्व के लिए अत्यावश्यक है।
43. निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक और सारभूत सन्देश है, जो उपर्युक्त परिच्छेद द्वारा व्यक्त किया गया है?
43. निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक और सारभूत सन्देश है, जो उपर्युक्त परिच्छेद द्वारा व्यक्त किया गया है?