तकनीकी प्रगति में निहित मानव-जाति के लिए सबसे बड़ा वरदान, निश्चित रूप से, भौतिक सम्पदा का संचय नहीं है। किसी व्यक्ति के
द्वारा जीवन में इनकी जितनी मात्रा का वास्तविक रूप में उपभोग किया जा सकता है, वह बहुत अधिक नहीं है। किन्तु फ़ुरसत के समय के उपभोग की संभावनाएँ उसी संकीर्ण सीमा तक सीमित नहीं हैं। जिन्होंने फ़ुरसत के समय के उपहार के सदुपयोग का कभी अनुभव नहीं किया है, वे लोग इसका दुरुपयोग कर सकते हैं। फिर भी, समाजों की एक अल्पसंख्या द्वारा फ़ुरसत के समय का रचनात्मक उपयोग किया जाना ही आदिम स्तर के बाद सभी मानव-प्रगति का मुख्य प्रेरणास्रोत रहा है।
उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
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फ़ुरसत के समय को लोग सदैव उपहार के रूप में देखते हैं तथा इसका उपयोग और अधिक भौतिक सम्पदा अर्जित करने के लिए करते हैं।
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कुछ लोगों द्वारा फ़ुरसत के समय का, नूतन और मौलिक चीजों के उत्पादन के लिए, उपयोग किया जाना ही मानव-प्रगति का मुख्य स्रोत रहा है।
इनमें से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध है/हैं?
उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
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फ़ुरसत के समय को लोग सदैव उपहार के रूप में देखते हैं तथा इसका उपयोग और अधिक भौतिक सम्पदा अर्जित करने के लिए करते हैं।
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कुछ लोगों द्वारा फ़ुरसत के समय का, नूतन और मौलिक चीजों के उत्पादन के लिए, उपयोग किया जाना ही मानव-प्रगति का मुख्य स्रोत रहा है।
इनमें से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध है/हैं?