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Q. 42
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पूरे विश्व में सरकार में प्रादेशिकता की एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति रही है, जिसके परिणामस्वरूप 1990 के दशक से क्षेत्रों और समुदायों की ओर सत्ता का व्यापक अधोगामी हस्तांतरण होता रहा है। इस प्रक्रिया को, जिसके अन्तर्गत अवराष्ट्रीय (सब-नैशनल) स्तर पर नई राजनीतिक सत्ताएँ और निकाय बनते हैं तथा उनकी क्षमता और शक्ति में वृद्धि होती है, प्रति-विकास (डीवोल्यूशन) कहते हैं।

प्रति-विकास की विशेषता है कि यह तीन घटकों से मिलकर बनता है, वे घटक हैं—राजनीतिक वैधता, सत्ता का विकेन्द्रीकरण और संसाधनों का विकेन्द्रीकरण। यहाँ राजनीतिक वैधता से आशय है निचले जनसमुदाय से विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया के लिए उठने वाली माँग, जिसमें विकेन्द्रीकरण के लिए एक राजनीतिक बल निर्मित करने की क्षमता होती है। कई मामलों में, आधारिक स्तर पर इसके लिए पर्याप्त राजनीतिक संघटन हुए बिना ही सरकार के ऊपरी स्तर से विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी जाती है, और ऐसे मामलों में विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया प्रायः अपने उद्देश्य पूरे नहीं कर पाती।

उपर्युक्त परिच्छेद से निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक, तर्कसंगत और विवेचनात्मक निष्कर्ष (इन्फरेंस) निकाला जा सकता है?

A

अवराष्ट्रीय राजनीतिक सत्ताओं के निर्माण के लिए और इस तरह सफल प्रति-विकास और विकेन्द्रीकरण सुनिश्चित करने के लिए शक्तिशाली जन नेताओं का उभरना अनिवार्य है।

B

सरकार के ऊपरी स्तर से क्षेत्रीय समुदायों पर, कानून द्वारा या अन्यथा, प्रति-विकास और विकेन्द्रीकरण को अधिरोपित किया जाना चाहिए।

C

प्रति-विकास को सफल होने के लिए ऐसे लोकतंत्र की अपेक्षा होती है, जिसमें निचले स्तर के लोगों की इच्छा की स्वतंत्र अभिव्यक्ति हो और आधारिक स्तर पर उनकी सक्रिय भागीदारी हो।

D

प्रति-विकास होने के लिए जनता में क्षेत्रवाद की प्रबल भावना होनी आवश्यक है।

Kepler. Discussing PYQs. Q.no. 42