पूरे विश्व में सरकार में प्रादेशिकता की एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति रही है, जिसके परिणामस्वरूप 1990 के दशक से क्षेत्रों और समुदायों की ओर सत्ता का व्यापक अधोगामी हस्तांतरण होता रहा है। इस प्रक्रिया को, जिसके अन्तर्गत अवराष्ट्रीय (सब-नैशनल) स्तर पर नई राजनीतिक सत्ताएँ और निकाय बनते हैं तथा उनकी क्षमता और शक्ति में वृद्धि होती है, प्रति-विकास (डीवोल्यूशन) कहते हैं।
प्रति-विकास की विशेषता है कि यह तीन घटकों से मिलकर बनता है, वे घटक हैं—राजनीतिक वैधता, सत्ता का विकेन्द्रीकरण और संसाधनों का विकेन्द्रीकरण। यहाँ राजनीतिक वैधता से आशय है निचले जनसमुदाय से विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया के लिए उठने वाली माँग, जिसमें विकेन्द्रीकरण के लिए एक राजनीतिक बल निर्मित करने की क्षमता होती है। कई मामलों में, आधारिक स्तर पर इसके लिए पर्याप्त राजनीतिक संघटन हुए बिना ही सरकार के ऊपरी स्तर से विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी जाती है, और ऐसे मामलों में विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया प्रायः अपने उद्देश्य पूरे नहीं कर पाती।
उपर्युक्त परिच्छेद से निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक, तर्कसंगत और विवेचनात्मक निष्कर्ष (इन्फरेंस) निकाला जा सकता है?
उपर्युक्त परिच्छेद से निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक, तर्कसंगत और विवेचनात्मक निष्कर्ष (इन्फरेंस) निकाला जा सकता है?