शिक्षा जीवन में महान बदलाव लाने की भूमिका निभाती है, खास कर इस तेजी से बदलते और वैश्वीकरण की तेज गति वाले विश्व में। विश्वविद्यालय बौद्धिक पूँजी के अभिरक्षक और संस्कृति तथा विशेषज्ञतापूर्ण ज्ञान के प्रवर्तक हैं। संस्कृति, चिंतन की क्रियाशीलता, और सौंदर्य तथा मानवीय भावनाओं की ग्रहणशीलता होती है। केवल बहुत सी जानकारीयों से युक्त व्यक्ति ईश्वर की धरती पर सिर्फ एक उबाऊ इंसान भर है। हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि ऐसे व्यक्ति तैयार किए जायें जिनके पास संस्कृति और विशेषज्ञतापूर्ण ज्ञान, दोनों हों। उनका विशेषज्ञतापूर्ण ज्ञान उन्हें आगे बढ़ने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा और उनकी संस्कृति उन्हें दर्शन की गहराइयों और कला की ऊँचाइयों तक ले जाएगी। साथ मिल कर यह मानवीय अस्तित्व को अर्थ प्रदान करेगा।
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- सुशिक्षित व्यक्तियों से रहित समाज आधुनिक समाज में रूपांतरित नहीं हो सकता।
- संस्कृति अर्जित किए बिना, किसी भी व्यक्ति की शिक्षा पूर्ण नहीं होती।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध हैं/हैं ?
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- सुशिक्षित व्यक्तियों से रहित समाज आधुनिक समाज में रूपांतरित नहीं हो सकता।
- संस्कृति अर्जित किए बिना, किसी भी व्यक्ति की शिक्षा पूर्ण नहीं होती।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध हैं/हैं ?