‘आनुवंशिक रूपांतरण [जेनेटिक मॉडिफिकेशन (GM)]’ प्रौद्योगिकी को व्यापक और सुविचारित रूप से अपनाने के मार्ग में जो गतिरोध है, वह है ‘बौद्धिक संपदा अधिकार’ की व्यवस्था, जो ऐसी प्रौद्योगिकियों के लिए गैर-सरकारी एकाधिकार सृजित करना चाहती है। यदि GM प्रौद्योगिकी अधिकांशतः कंपनी चालित हो, तो यह लाभ को अधिकतम करना चाहती है और वह भी थोड़ी ही अवधि में। यही कारण है कि कंपनियाँ शाकनाशी-सहिष्णु और नाशक जीव-प्रतिरोधी फसलों के लिए बड़े निवेश करती हैं। ऐसे गुणधर्म थोड़े समय के लिए ही बने रह पाते हैं, क्योंकि काफी जल्दी ही नाशक जीव और खरपतवार विकसित होने लगेंगे और ऐसे प्रतिरोध पर काबू पा लेंगे। कंपनियों को यह अनुकूल ठहरता है। राष्ट्रीय किसान आयोग ने यह बात उठाई थी कि आनुवंशिक रूपांतरण में प्राथमिकता ऐसे जीन के समावेशन को दी जानी चाहिए जो सूखा, लवणता और अन्य कष्टकर प्रभावों के लिए प्रतिरोध प्रदान करने में सहायक हों।
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- कृषि से संबंधित प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव के मुद्दे पर GM प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा समुचित विचार नहीं किया जा रहा है ।
- अंततोगत्वा, GM प्रौद्योगिकी भूमंडलीय तापन के कारण उत्पन्न होने वाली कृषि समस्याओं का समाधान नहीं कर पाएगी ।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध हैं/हैं ?
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- कृषि से संबंधित प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव के मुद्दे पर GM प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा समुचित विचार नहीं किया जा रहा है ।
- अंततोगत्वा, GM प्रौद्योगिकी भूमंडलीय तापन के कारण उत्पन्न होने वाली कृषि समस्याओं का समाधान नहीं कर पाएगी ।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध हैं/हैं ?