भारत में ऐसे बैंकिंग संपर्की हैं, जो दूर-दराज़ के पिछड़े क्षेत्रों के लोगों को बैंकिंग के दायरे में लाने में मदद करते हैं। वे ऐसा कर सकें, इसके लिए बैंक लागतों में कोई कमी नहीं कर सकते। वे वित्तीय शिक्षा और साक्षरता में निवेश करने की उपेक्षा भी नहीं कर सकते। बैंकिंग संपर्की एक तरह से इतने कम हैं कि उन्हें व्यवस्थागत जोखिम के रूप में नहीं देखा जा सकता। तथापि, भारत के बैंकिंग नियामक ने प्रतिबंध लगा रखा है कि वे केवल एक बैंक के लिए कार्य करें, संभवतः अंतर-पणन (आर्बिट्रेज) से बचाव के लिए। बैंकिंग तक पूरी पहुँच लाने के प्रयासों में तभी सफलता मिल सकती है, जब दूर-दराज़ में काम करने वाले आखिरी छोर के ऐसे कार्यकर्ताओं के लिए और उन प्रबंधकों के लिए भी, जो न केवल आधारभूत बैंक लेखाओं को, बल्कि दुर्घटना एवम् जीवन बीमा तथा लघु पेंशन योजनाओं जैसे उत्पादों को भी सुनिश्चित करते हैं, काम करने में बेहतर प्रोत्साहन उपलब्ध हों।
उपर्युक्त परिच्छेद से निम्नलिखित में से कौन-सा एक, सर्वाधिक तर्कसंगत, विवेकपूर्ण और निर्णायक निष्कर्ष निकाला जा सकता है ?
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