भारत में तपेदिक (TB) संक्रमित बहुसंख्य लोग निर्धन हैं और उनको पर्याप्त पोषण, उपयुक्त आवास का अभाव है और बचाव के बारे में उनकी समझ न के बराबर है। ऐसे में, तपेदिक परिवारों का सर्वनाश कर देता है, निर्धनों को और निर्धन बनाता है, खास तौर पर महिलाओं और बच्चों को ग्रस्त करता है, और उन्हें निर्वासन और रोजगार की बर्बादी की ओर ले जाता है। सच्चाई यह है कि यदि तपेदिक उन्हें न भी मारे, तब भी भूख और गरीबी से वे मर जाएंगे। दूसरी सच्चाई यह है कि इसका गहरा बैठा हुआ लांछन, परामर्श का अभाव, मंहगा उपचार और साधन-प्रदाताओं तथा परिवार से पर्याप्त संबल का अभाव, यंत्रणाकारी पार्श्व-प्रभावों के साथ मिल कर रोगी को उपचार जारी रखने में हतोत्साहित करते हैं — जिसके अनर्थकारी स्वास्थ्य-संबंधी परिणाम होते हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा एक, उपर्युक्त परिच्छेद द्वारा दिया गया सर्वाधिक तर्कसंगत, विवेकपूर्ण और निर्णायक संदेश है ?
निम्नलिखित में से कौन-सा एक, उपर्युक्त परिच्छेद द्वारा दिया गया सर्वाधिक तर्कसंगत, विवेकपूर्ण और निर्णायक संदेश है ?