‘आनुवंशिक रूपांतरण [जेनेटिक मॉडिफिकेशन (GM)]’ प्रौद्योगिकी को व्यापक और सुविचारित रूप से अपनाने के मार्ग में जो गतिरोध है, वह है ‘बौद्धिक संपदा अधिकार’ की व्यवस्था, जो ऐसी प्रौद्योगिकियों के लिए गैर-सरकारी एकाधिकार सृजित करना चाहती है। यदि GM प्रौद्योगिकी अधिकांशतः कंपनी चालित हो, तो यह लाभ को अधिकतम करना चाहती है और वह भी थोड़ी ही अवधि में। यही कारण है कि कंपनियाँ शाकनाशी-सहिष्णु और नाशक जीव-प्रतिरोधी फसलों के लिए बड़े निवेश करती हैं। ऐसे गुणधर्म थोड़े समय के लिए ही बने रह पाते हैं, क्योंकि काफी जल्दी ही नाशक जीव और खरपतवार विकसित होने लगेंगे और ऐसे प्रतिरोध पर काबू पा लेंगे। कंपनियों को यह अनुकूल ठहरता है। राष्ट्रीय किसान आयोग ने यह बात उठाई थी कि आनुवंशिक रूपांतरण में प्राथमिकता ऐसे जीन के समावेशन को दी जानी चाहिए जो सूखा, लवणता और अन्य कष्टकर प्रभावों के लिए प्रतिरोध प्रदान करने में सहायक हों।
निम्नलिखित में से कौन-सा एक, उपर्युक्त परिच्छेद द्वारा दिया गया सर्वाधिक तर्कसंगत, विवेकपूर्ण और निर्णायक संदेश है ?
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