भारत समेत पूरे विश्व के ग्रामीण निर्धनों का मानव-कृत जलवायु परिवर्तन में नगण्य योगदान रहा है, तथापि इसके प्रभावों का सामना करने में वे अग्रिम पंक्ति में हैं। कृषक अब वर्षा और तापमान के ऐतिहासिक औसतों पर भरोसा नहीं कर सकते, और अधिक बारबार होने वाली आत्यंतिक मौसमी घटनाएँ, जैसे सूखा और बाढ़, महाविपदाओं के रूप में परिणामित हो सकती हैं। और नए खतरे सामने हैं, जैसे कि समुद्र स्तर में वृद्धि और जल-पृष्ठ पर पिघलते हुए हिमनदों का प्रभाव। छोटे कृषि-फार्म कितने महत्वपूर्ण हैं? पूरे विश्व में लगभग दो अरब (बिलियन) लोग अपने भोजन और आजीविका के लिए उन पर निर्भर हैं। भारत में छोटी जोत वाले किसान देश का 41 प्रतिशत खाद्यान्न और अन्य खाद्य-पदार्थ उत्पादित करते हैं जिसका स्थानीय एवम् राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में योगदान है।
उपर्युक्त परिच्छेद उपलक्षित करता है कि
- भारत में खाद्य असुरक्षा की संभावित समस्या है।
- भारत को अपनी आपदा प्रबंधन की क्षमताएँ मजबूत करनी होंगी।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध हैं/हैं?
उपर्युक्त परिच्छेद उपलक्षित करता है कि
- भारत में खाद्य असुरक्षा की संभावित समस्या है।
- भारत को अपनी आपदा प्रबंधन की क्षमताएँ मजबूत करनी होंगी।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध हैं/हैं?