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Q. 46
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भारत के लोग बहुत अधिक संख्या में निर्धन हैं, और मुश्किल से सिर्फ 10 प्रतिशत व्यक्ति संगठित क्षेत्र में नियोजित हैं। हमें विश्वास दिलाया जा रहा है कि प्रबल आर्थिक संवृद्धि से पर्याप्त रोज़गार उत्पन्न हो रहे हैं। लेकिन ऐसा है नहीं। जब हमारी अर्थव्यवस्था 3 प्रतिशत प्रतिवर्ष बढ़ रही थी, तब संगठित क्षेत्र में रोज़गार 2 प्रतिशत प्रतिवर्ष बढ़ रहा था। ज्यों ही अर्थव्यवस्था 7 - 8 प्रतिशत प्रतिवर्ष बढ़नी शुरू हुई, संगठित क्षेत्र में रोज़गार बढ़ने की दर वास्तव में घट कर 1 प्रतिशत प्रतिवर्ष रह गई।

उपर्युक्त परिच्छेद का निहितार्थ यह प्रतीत होता है कि

A
  1. अधिकांश आधुनिक आर्थिक संवृद्धि प्रौद्योगिकीय प्रगति पर आधारित है।
B
  1. काफी मायने में आधुनिक भारतीय अर्थव्यवस्था श्रम-प्रधान, प्राकृतिक संसाधन-आधारित आजीविका के साथ पर्याप्त सहजीवी संबंध को प्रोत्साहन नहीं देती।
C
  1. भारत में सेवा क्षेत्र बहुत श्रम-प्रधान नहीं है।
D
  1. साक्षर ग्रामीण जनसंख्या संगठित क्षेत्र में प्रवेश करने की इच्छुक नहीं है।
Kepler. Discussing PYQs. Q.no. 46