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Q. 63
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किसी अध्ययन में, वैज्ञानिकों ने अल्प-पोषित तथा सुपोषित शिशुओं और छोटे बच्चों के सूक्ष्मजीवों (माइक्रोबायोम्स) की तुलना की। कुपोषित और स्वस्थ बच्चों के मल के नमूनों से आहार-नली के रोगाणुओं को अलग किया गया। एक ही उम्र के स्वस्थ बच्चों में पाए गए सुविकसित "परिपक्व" सूक्ष्मजीवों की तुलना में कुपोषित बच्चों में सूक्ष्मजीवों "अपरिपक्व" और कम विविध पाया गया। कुछ अध्ययनों के अनुसार, माँ के दूध के रासायनिक संघटन में एक आपरिवर्तित शर्करा (सायलीलेटेड ओलिगोसैक्कराइड्स) पाई गई है। इसका शिशु द्वारा अपने खुद के पोषण के लिए उपयोग नहीं किया जाता। तथापि, शिशु का सूक्ष्मजीवों संरचित करने वाले जीवाणु इस शर्करा पर, जो उनके खाद्य की तरह काम आता है, फलते-फूलते हैं। कुपोषित माताओं के दूध में इस शर्करा की मात्रा कम होती है। परिणामस्वरूप, उनके शिशुओं के सूक्ष्मजीवों परिपक्व होने में विफल हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप शिशुओं में कुपोषण पाया जाता है।

उपर्युक्त परिच्छेद से निम्नलिखित में से कौन-सा एक, सर्वाधिक तर्कसंगत, विवेकपूर्ण और निर्णायक निष्कर्ष निकाला जा सकता है ?

A

यदि बच्चों में कुपोषण की दशा आहार-नली के जीवाणुओं के कारण होती है, तो इसका उपचार नहीं किया जा सकता।

B

कुपोषित शिशुओं की आहार-नलियों में परिपक्व सूक्ष्मजीवों संरोपित किए जाने चाहिए।

C

कुपोषित माताओं के शिशुओं को माँ के दूध की जगह डेरी का सायलीलेटेड ओलिगोसैक्कराइड्स से प्रबलित दूध पिलाया जाना चाहिए।

D

पोषण पर आहार-नली के जीवाणुओं के अहानिकर प्रभावों पर अनुसंधान के नीतिगत निहितार्थ हैं।

Kepler. Discussing PYQs. Q.no. 63