लगभग 56 मिलियन वर्ष पूर्व, अटलांटिक महासागर पूरी तरह फैला हुआ नहीं था और जंतु, जिनमें शायद हमारे प्राइमेट पूर्वज भी शामिल थे, एशिया से यूरोप होते हुए उत्तरी अमेरिका तक पूरे ग्रीनलैंड में चल कर जा सकते थे। पृथ्वी आज की अपेक्षा अधिक उष्ण थी, किंतु जैसे-जैसे पुरानूतन युग समाप्त हुआ और आदिनूतन युग प्रारंभ होने लगा, यह और अधिक, बल्कि तेजी से और आमूल रूप से, उष्ण होने वाली थी। कारण था कार्बन का अति विशाल रूप से भूवैज्ञानिकतः अकस्मात् निर्मुक्त होना। पुरानूतन-आदिनूतन ऊष्मीय महत्तम (पैलियोसीन-इओसीन थर्मल मैक्सीमम) या PETM कही जाने वाली इस अवधि के दौरान, वायुमंडल में उतना कार्बन अंतःक्षिप्त हुआ जितना आज मनुष्य द्वारा पृथ्वी के कोयले, तेल और प्राकृतिक गैस के सारे भंडारों को जला देने पर अंतःक्षिप्त होता। PETM लगभग 1,50,000 वर्षों तक बनी रही जब तक कि कार्बन की अतिशय मात्रा पुनःअवशोषित नहीं हो गई। इससे सूखा, बाढ़, कीट प्लेग और कतिपय विलोपन हुए। पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व बना रहा — वास्तव में, यह फला-फूला — लेकिन इसमें घोर भिन्नता आ गई।
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :