मृदा, जिसमें हमारे लगभग सभी खाद्य-पदार्थ उगते हैं, एक जीवंत संसाधन है जिसके बनने में वर्षों लगते हैं। तथापि, यह मिनटों में नष्ट हो सकती है। प्रति वर्ष 75 अरब (बिलियन) टन उर्वर मृदा क्षरण के कारण नष्ट हो जाती है। यह चिंताजनक है — और केवल खाद्य उत्पादकों के लिए ही नहीं। मृदा विशाल मात्रा में कार्बन डाइ-ऑक्साइड को कार्बनिक (ऑर्गेनिक) कार्बन के रूप में रोके रख सकती है और वायुमंडल में उन्मुक्त हो जाने से बचाए रख सकती है।
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- बड़े पैमाने पर मृदा का क्षरण विश्व में व्यापक खाद्य असुरक्षा का प्रमुख कारण है।
- मृदा का क्षरण मुख्यतः मानवोद्भविक (ऐंथ्रोपोजेनिक) है।
- मृदा के धारणीय प्रबंधन से जलवायु परिवर्तन का सामना करने में मदद मिलती है।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध हैं/हैं ?
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- बड़े पैमाने पर मृदा का क्षरण विश्व में व्यापक खाद्य असुरक्षा का प्रमुख कारण है।
- मृदा का क्षरण मुख्यतः मानवोद्भविक (ऐंथ्रोपोजेनिक) है।
- मृदा के धारणीय प्रबंधन से जलवायु परिवर्तन का सामना करने में मदद मिलती है।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध हैं/हैं ?