विद्यालयी उम्र में आने वाले बच्चों की विद्यालयी शिक्षा तक पहुँच होना लगभग विश्वव्यापी है, किंतु गुणतायुक्त शिक्षा तक पहुँच होने में सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर एक तीव्र ढाल दिखाई देती है। गैर-सरकारी विद्यालयों में कमजोर वर्गों के लिए कोटा का उपबंध निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 द्वारा किया गया है। इन कोटाओं ने सामाजिक एकीकरण और शिक्षा में साम्य के उन मुद्दों पर एक बहस थोप दी है जिनसे गैर-सरकारी कर्ता काफी-कुछ बचे हुए थे। समतावादी शिक्षा प्रणाली का विचार, जिसका मुख्य ध्येय अवसर की समानता हो, गैर-सरकारी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की सोच के दायरे से बाहर प्रतीत होता है। इसलिए, कोटा अधिरोपित किए जाने से प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है, जो कभी-कभी न्यायोचित भी होता है।
उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- अवसर की समानता को एक वास्तविकता बना देना भारतीय शिक्षा प्रणाली का आधारभूत लक्ष्य है।
- वर्तमान भारतीय विद्यालय प्रणाली समतावादी शिक्षा प्रदान करने में असमर्थ है।
- गैर-सरकारी विद्यालयों का उन्मूलन और अधिकाधिक सरकारी विद्यालयों की स्थापना ही समतावादी शिक्षा सुनिश्चित करने का एकमात्र मार्ग है।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध हैं/हैं ?
उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- अवसर की समानता को एक वास्तविकता बना देना भारतीय शिक्षा प्रणाली का आधारभूत लक्ष्य है।
- वर्तमान भारतीय विद्यालय प्रणाली समतावादी शिक्षा प्रदान करने में असमर्थ है।
- गैर-सरकारी विद्यालयों का उन्मूलन और अधिकाधिक सरकारी विद्यालयों की स्थापना ही समतावादी शिक्षा सुनिश्चित करने का एकमात्र मार्ग है।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध हैं/हैं ?