जलवायु परिवर्तन के कारण वास्तव में कुछ पादपों को वर्धन-काल अधिक लंबे हो जाने और अधिक कार्बन डाइ-ऑक्साइड मिलने का लाभ पहुँच सकता है। तथापि, अपेक्षाकृत अधिक उष्ण विश्व के अन्य प्रभावों, जैसे कि नाशक जीव, सूखा और बाढ़ के अधिक हो जाने का अहानिकर होना कम हो जाएगा। विश्व कैसे अनुकूलन करेगा? अनुसंधानकर्ता यह अनुमान करते हैं कि 2050 तक मक्का, आलू, चावल और गेहूँ, इन चार पण्य वस्तुओं की उपयुक्त शस्य-भूमियाँ बदल जाएंगी, जिनसे कुछ जगहों पर किसानों को बाध्य होकर नई फसलों का रोपण करना पड़ेगा। तापन से कुछ कृषि-भूमियों को लाभ पहुँच सकता है, कुछ को नहीं। एकमात्र जलवायु ही उपज को निर्धारित नहीं करती; राजनीतिक परिवर्तन, विश्वव्यापी माँग, और कृषि पद्धतियाँ इस बात को प्रभावित करेंगी कि भविष्य में कृषि-भूमियाँ कैसा निष्पादन करेंगी।
उपर्युक्त परिच्छेद से निम्नलिखित में से कौन-सा एक, सर्वाधिक तर्कसंगत और विवेकपूर्ण निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
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