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Q. 61
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भारत का आर्थिक पदछाप (फुटप्रिंट), इसकी जनसंख्या को देखते हुए, अभी भी US, यूरोपीय संघ या चीन की तुलना में कम है। अन्य अर्थव्यवस्थाओं से सीखने के लिए इसके पास काफी कुछ है, तथापि इसे उन समाधानों को ही कार्यान्वित करना चाहिए जो इसकी अनूठी परिस्थितियों के अनुरूप हैं। भारत को वर्तमान अधोगामी उपागम की बजाय एक सहयोग आधारित प्रभावी दीर्घकालिक नियामक व्यवस्था की खास तौर पर आवश्यकता है। विनियम वांछित परिणाम लाने का प्रयास करते हैं, तथापि ये किसी न किसी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक उपकरण के रूप में बार-बार इस्तेमाल किए जाते हैं। प्रायः विनियम रोजगार और आर्थिक संवृद्धि पर पड़ने वाले असर — या कम प्रतिबंधी विकल्पों — का विचार करने में असफल रह जाते हैं। विनियमों का इस्तेमाल भविष्य में और अधिक व्यापक रूप से साझी होने वाली समृद्धि की कीमत पर स्थानीय बाजारों को बचाने में किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, विनियमों के अनिवार्य रूप से अनेक अनैच्छिक परिणाम होते हैं। आज की अति प्रतियोगी वैश्विक अर्थव्यवस्था में विनियमों को ऐसे “हथियारों” के रूप में देखा जाना चाहिए जो अधिकांश नागरिकों के आर्थिक कल्याण को समुन्नत करते हुए लागत के औचित्य के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ लाने का प्रयास करें।

उपर्युक्त परिच्छेद से निम्नलिखित में से कौन-सा एक, सर्वाधिक तर्कसंगत, विवेकपूर्ण और निर्णायक निष्कर्ष निकाला जा सकता है ?

A

एक बेहतर नियामक व्यवस्था भारत को इसकी जनसंख्या के यथा-उपयुक्त आमाप की अर्थव्यवस्था प्राप्त करने में सहायक होगी।

B

प्रतियोगी वैश्विक अर्थव्यवस्था में, भारत को विनियमों का युक्तिपूर्वक ही इस्तेमाल करना चाहिए।

C

भारत में विनियम आज की अति प्रतियोगी वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ अपने एकीकरण का समर्थन नहीं करते।

D

भारत की नियामक व्यवस्था के विकास में रोजगार के सृजन और आर्थिक संवृद्धि के विचार को प्रबल रूप से रखा जाना चाहिए।

Kepler. Discussing PYQs. Q.no. 61