असमानता न केवल दिखाई देती है, बल्कि अनेक उदाहरणों में सांख्यिकीय रूप से मापी जा सकती है, किंतु इसे संचालित करने वाली आर्थिक शक्ति न तो दिखाई देती है और न ही मापी जा सकती है। गुरुत्व बल की ही तरह, शक्ति असमानता का संधटक सिद्धांत है, चाहे वह आय, या संपत्ति, लिंग, वंश, धर्म और क्षेत्र, किसी की भी हो। इसके प्रभाव सभी क्षेत्रों में व्यापक रूप से दिखते हैं, किंतु जिन रीतियों से आर्थिक शक्ति दृश्यमान आर्थिक चरों को तोड़ती-मरोड़ती है वे अदृश्य रूप से अस्पष्ट बने रहते हैं।
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- किसी समाज में असमानता के होने के लिए आर्थिक शक्ति ही एकमात्र कारण है।
- आय, संपत्ति, आदि विभिन्न प्रकार की असमानता शक्ति को सुदृढ़ करती है।
- आर्थिक शक्ति को प्रत्यक्ष आनुभविक विधियों की अपेक्षा उसके प्रभावों के माध्यम से बेहतर विश्लेषित किया जा सकता है।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध हैं/हैं ?
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- किसी समाज में असमानता के होने के लिए आर्थिक शक्ति ही एकमात्र कारण है।
- आय, संपत्ति, आदि विभिन्न प्रकार की असमानता शक्ति को सुदृढ़ करती है।
- आर्थिक शक्ति को प्रत्यक्ष आनुभविक विधियों की अपेक्षा उसके प्रभावों के माध्यम से बेहतर विश्लेषित किया जा सकता है।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध हैं/हैं ?